Shri Shri Satyanarayan Mahatya

Almost all Hindus, throughout Andhra Pradesh, have strong faith, belief, and devotion towards Sriman Narayanaa, an incarnation of Vishnu. There is a very ancient famous temple for Shri Satya Narayana Swami at Annavaram, East Godavari district, Andhra Pradesh. (near Visakhapatnam ), India. This vratam is performed daily in Annavaram. Large numbers of devotees, many with families, visit the temple, offer prayers, perform this Vrata there, right in the temple.

Satya Narayana puja is a very popular ritual in most parts of India including Karnataka, Andhra Pradesh, Gujarat, Bengal, Orissa, Maharashtra and Goa. It is not known clearly when the origin of puja is started, but it is believed that doing this vratam (puja) is started for the first time in Andhra Pradesh.

The Satya Narayana Puja is performed in reverence to the Narayana form of Lord Vishnu. The Lord in this form is considered an embodiment of truth.

Śrī Viṣṇu Āratī

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश…
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय जगदीश…
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश…
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
करुणा हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश…
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश…

Satya Nārāyaṇa Āratī
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ॥
सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक-हरणा ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
रत्न जडैत सिंहासन, अद्भुत छवि राजे ।
नारद करत नीराजन, घंटा ध्वनि बाजे ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
प्रकट भए कलिकारन, द्विज को दरस दियो ।
बूढओ ब्राह्मण बनकर, कञ्चन महल कियो ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी ।
चन्द्रचूड इक राजा, तिनकी विपति हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही ।
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्हीं ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्यो ।
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनको काज सरो ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
ग्वाल-बाल सङ्ग राजा, बन में भक्ति करी ।
मनवाञ्छित फल दीन्हो, दीन दयालु हरि ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
चढत प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा ।
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावे ।
तन-मन सुख-संपत्ति मनवाञ्छित फल पावे ॥ ॐ जय लक्ष्मी...
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक-हरणा ॥ ॐ जय लक्ष्मी...